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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 36, Verse 13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 36, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

अनुभूतिवशान्नित्यमर्कादीनां प्रकाशिनी । स्वादिनी सर्वभूतानां भाविनी भवभोगिनाम् ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

वही चिति जगत को प्रकाश, भोग ओर जन्म देनेवाली है, ऐसा कहते है । उस चित्तत्त्व का दूसरा नाम अनुभूति है, उक्त अनुभूति से ही वह सूर्य चन्द्रादि को प्रकाशित करता है, सब प्राणियों के विषयभोग में निमित्त है और संसार का भोग करनेवाले जीवों के जन्म आदि में भी वही निमित्त है, क्योकि "आनन्दाद्धयेव खल्विमानि भूतानि जायन्ते" ऐसी श्रुति है