Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 35, Verse 40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 35, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
बन्धमोक्षदशाहीना द्वित्वैकत्वविवर्जिता ।
सर्वैव ब्रह्मसत्तेयमित्येषा परमार्थता ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
बन्धन-मोक्ष अवस्थाओं से रहित, द्वित्व-एकत्व से शून्य यह सब ब्रह्मसत्ता ही है, इस प्रकार
की जो प्रतीति है, वह परमार्थता है