Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 35, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 35, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
सर्वगे स्वात्मनि स्वच्छे एषोऽहमिति भावना ।
एतत्तद्बन्धनं लोके स्वविकल्पोपकल्पितम् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
सर्वव्यापक, स्वच्छ, आत्मा में
“मैं यह देह मात्र हूँ” इस प्रकार की जो भावना है, यह लोक में अपने विकल्पों से कल्पित उसका बन्धन
है