Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 64
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, verse 64 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 64
संस्कृत श्लोक
अथ ते अपि संत्यज्य सर्वाहंकृतिवर्जितः ।
संतिष्ठेत तथात्युच्चैः पदमेवाधिरोहति ॥ ६४ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर उन दो अहंकारों का भी त्याग
करके सब अहंकारों से रहित होकर यदि स्थित रहे, तो वह अति उन्नत पद में आरूढ होता है