Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 63
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, verse 63 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 63
संस्कृत श्लोक
अहंकारदृशावेते पूर्वोक्ते भावयन्यदि ।
तिष्ठेदुपैति परमं तत्पदं पुरुषोऽनघ ॥ ६३ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी बात को विशद करते हैं।
हे निष्पाप श्रीरामचन्द्रजी, पूर्वोक्त प्रथम इन दो अहंकार दृष्टियों की भावना करता हुआ पुरुष
यदि स्थित रहे, तो परमपुरुषार्थ प्राप्त हो जाता है