Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 60
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, verse 60 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
आचारचारुचरितस्य विविक्तवृत्तेः संसारसौख्यफलदुःखदशास्त्रगृध्नोः ।
आयुर्यशांसि च गुणाश्च सहैव लक्ष्म्या फुल्लन्ति माधवलता इव सत्फलाय ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
जिसका चरित्र सदाचार से सुन्दर है, बुद्धि विवेकशील है
ओर संसार के सौख्यफलरूपी दुःखदशाओं मे जिसे लालच नहीं है, उस पुरुष के यश, गुण ओर आयु
ये तीनों लक्ष्मी के साथ ही सत्फल के लिए वसन्त ऋतु की लताओं के समान विकसित होते हैं