Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 58
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, verse 58 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 58
संस्कृत श्लोक
अनर्थायार्थसंपत्तिर्भोगौघो भवरोगदः ।
आपदः संपदः सर्वाः सर्वत्रानादरो जयः ॥ ५८ ॥
हिन्दी अर्थ
धनसम्पत्ति अनर्थो की जननी हे ओर विविध भोग संसाररूपी रोग के हेतु हे । आपत्तियाँ
ही सब सम्पत्तियाँ हैं और सब वस्तुओं की अवहेलना ही विजय है