Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verses 52–53
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, verses 52–53 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 52,53
संस्कृत श्लोक
भवतां भूरिसङ्गानामधुनेन्द्रियदामतः ।
इतःप्रभृति मा भूयो गम्यतामधमादधः ॥ ५२ ॥
इदं विचार्यतां शास्त्रमस्त्रमापन्निवारणम् ।
रणे शितशरश्रेणिशतनिर्लूनवारणे ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
इस समय से लेकर फिर नीचे से नीचे आप मत जाईये । सैकड़ों तीक्ष्ण बाणो से जिसमें हाथी
काटे गये हैं, ऐसे युद्ध में शीघ्र प्राप्त हुए महाभय, मृत्यु आदि आपत्तियों का निवारण करनेवाले अरत्ररूप
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