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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 47

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, verse 47 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 47

संस्कृत श्लोक

त्रायेते मृत्युतो ह्येते न कदाचन भोगकाः । गायन्ति सिद्धसुन्दर्यो येषामिन्दुसितं यशः ॥ ४७ ॥

हिन्दी अर्थ

अप्सरा जिनके चन्द्रमा के समान शुभ्र यश का आकाश के समान सब देश ओर काल में व्याप्त गीतों से गान करती हैं, वे लोग ही जीते हैं और सब मरे हैं