Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 46
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, verse 46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
स्थीयतां मुच्यतामन्तर्भोगजालमवास्तवम् ।
संस्तवः क्रियतां कीर्त्या गुणैर्गगनगामिमिः ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वर्ग तक प्रसिद्ध हुए गुणों से प्राप्त हुई कीर्ति से साधु जनों के मुख से वाहवाही लेना चाहिए ये कीर्ति
ओर सज्जनो की वाहवाही मृत्यु से रक्षा करती हैं, तुच्छ भोग कभी भी मृत्यु से त्राण नहीं देते