Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
अहङ्काराम्बुदच्छन्नं परमार्थेन्दुमण्डलम् ।
रसायनमयं शीतमदृश्यत्वमुपागतम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
अहंकार की अनर्थ हेतुता कह कर वह पुरुषार्थ का विघात भी करती है, ऐसा कहते हैं।
अहंकाररूपी मेघ से आच्छादित, आनन्दैकरस, तीनों तापों से रहित पुरुषार्थरूपी चन्द्रमण्डल
अदृश्य हो गये हे