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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 23

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

यत्नेनाप्यनुभूतोऽर्थः सत्ये कर्तुमपह्नवम् । अज्ञोऽन्तश्च न शक्रोति शवमाक्रमणं यथा ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

इसलिए भी अज्ञ को उपदेश नहीं देना चाहिए, ऐसा कहते है। जैसे शव अपने चरणों से भ्रमण नहीं कर सकता वैसे ही अज्ञ पुरुष को चाहे कितने ही अधिक प्रयत्न से क्यों न न समझाइये, तथापि वह भीतर मन, बुद्धि आदि के भेद से ओर बाहर रूप, रस आदि के भेद से अनुभूत द्वैतरूप अर्थ का सत्य अधिष्ठान में "नेति नेति" से बाध नहीं कर सकता ओर अध्यस्त पदार्थ के बाध के बिना अधिष्ठान तत्त्व का बोध नहीं किया जा सकता, इसलिए उसको बोध का उपदेश देना व्यर्थ हे