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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verses 19–20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, verses 19–20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 19,20

संस्कृत श्लोक

गिरिवर्षणमम्बुवर्षणं विविधोग्रायुधवर्षणं तथा । विषमाशनिवर्षणं च ते सममन्योन्यमथाग्निवर्षणम् ॥ १९ ॥ अनयन्नयमार्गकोविदा दलिताशेषगिरीन्द्रभित्तयः । ससृजुश्च समं समन्ततः करिकुम्भेष्विव पुण्यवर्षणम् ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

वे देव ओर असुर एक ही साथ एक दूसरे पर पर्वतो की वृष्टि, जल की वृष्टि, विविध भीषण आयुधो की वृष्टि, विषम वलो की वृष्टि ओर अग्निवृष्टि करते थे, नीतिमार्ग को जाननेवाले वे देव ओर असुर, जिन्होंने सबल श्रेष्ठ पर्वतो के शिखर तोड़ दिये थे, चारों ओर एक साथ हाथियों के कुम्भस्थलों पर विशेष उत्सव में क्रीडा के लिए पिचकारी आदि से कुकुम, चन्दन आदि रस की वृष्टि के समान उर्पयुक्त वृष्टियों की सृष्टि करते थे