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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verse 7

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

अन्विष्टानपि यत्नेन नालभन्तासुराः सुरान् । घनजालवनोड्डीनान्सिंहा हरिणकानिव ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे सिंह निबिड़ लतादि जालों से भरे हुए वन में दौड़कर गये हुए हरिणों को नहीं पाते हैं, वैसे ही असुर बड़े प्रयत्नसे खोजने पर भी देवताओं को न पा सके