Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verses 39–40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, verses 39–40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 39,40
संस्कृत श्लोक
तत्तावद्युक्तियुद्धेन तान्प्रबोधयतामराः ।
यावदभ्यासवशतो भविष्यन्ति सवासनाः ॥ ३९ ॥
ततो वश्या भविष्यन्ति भवतां बद्धवासनाः ।
तृष्णाऽप्रोताशया लोके न च केचन पेलवाः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
तत्त्वज्ञो की अपेक्षा उनमें कौन सी कमी है 2 जिससे वे वासना ग्रहण करेंगे ? इस पर कहते है।
शम्बरासुर से निर्मित वे अत्यन्त अज्ञ पुरुष थे, अतः जब वे वासना का ग्रहण करेंगे, तब आप लोगों
के सुजेय हो जायेंगे ॥ ३ ८॥ इसलिए हे देवताओं, आप लोग सर्वप्रथम युक्ति युद्ध से उन्हें व्यवहार कार्यों
में जागरूक कीजिये, व्यवहार कार्यो में अभ्यस्त होने के कारण वे वासना युक्त हो जायेंगे वासनाओं
के बद्धमूल होने पर वे आप लोगों के वशीभूत हो जायेंगे, कोई भी पुरुष यदि तृष्णा से बद्ध अंतःकरणवाले
न हो, तो वे सहज में सुजेय नहीं होते