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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, Verse 58

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, verse 58 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 58

संस्कृत श्लोक

वघुरशनिनिपातखण्डिताङ्गा दलितशिलाशकलाः ककुम्मुखेषु । प्रलयसमयसूचकाः सुराणां सुरतरुघर्घरघस्मराः समीराः ॥ ५८ ॥

हिन्दी अर्थ

अब औत्पातिक आँधी का वर्णन करते हैं। वरं के गिरने से जिनके अंग खण्डित हो गये थे और जिन्होंने पत्थरों के टुकड़ों को चूर-चूर कर दिया था, प्रलय के समय को सूचित करनेवाले तथा कल्पवृक्ष में रहनेवाले भ्रमर, कोकिल आदि की ध्वनियों को विलीन कर देनेवाले प्रचण्ड वायु (ओंधी) दिशाओं में बहे