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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, Verses 30–32

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, verses 30–32 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 30-32

संस्कृत श्लोक

हेत्युग्रवातनिष्पिष्टपतद्वैमानिकव्रजम् । अस्त्रोदिताब्धिवार्योघप्लावितव्योमपत्तनम् ॥ ३० ॥ वहन्महास्त्रपातासिशूलशक्तिनदीशतम् । शैलपक्षोद्भटास्फोटलुठद्ब्रह्माण्डमण्डपम् ॥ ३१ ॥ दैत्यपार्ष्णिप्रहारौघपतल्लोकेशपत्तनम् । नारीहलहलारावरणत्कङ्कणमन्दिरम् ॥ ३२ ॥

हिन्दी अर्थ

उस युद्ध मे आयुधरूपी आँधी से पीसे गये वैमानिको के समूह गिर रहे थे, अस्त्र से उत्पन्न हुए समुद्रो के जल के प्रवाह से आकाश में स्थित अमरावती आदि नगर आप्लावित थे, महास्त्र के संपात से तलवार, शूल, शक्ति आदि रूप सैकड़ों नदियाँ बह रही थी, पर्वतो के समीप में घोर योद्धाओं के ताल ठोकने के शब्दों से ब्रह्माण्डरूप मण्डप काँप रहा था, दत्यो की एड़ियों के प्रहारो से लोकपालों के लोक गिर रहे थे ओर स्त्रियों के हल-हल शब्द के साथ मन्दिरो में ककण बज रहे थे