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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, Verses 26–29

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, verses 26–29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 26-29

संस्कृत श्लोक

सेनयोः क्षुब्धयोरासीद्युद्धमुद्धतदानवम् । निष्पिष्टनगरग्रामगिरिकाननमानवम् ॥ २६ ॥ महाहेतिशतच्छिन्नदानवाचलपूर्णदिक् । अन्योन्याहतहेत्यादिचूर्णपूर्णाम्बरोदरम् ॥ २७ ॥ भुशुण्डीमण्डलास्फोटस्फुटन्मेरुशिरःशतम् । शरमारुतनिर्लूनदैत्यदेवमुखाम्बुजम् ॥ २८ ॥ चक्रावर्तशतभ्रान्तदेवदैत्यजरत्तणम् । सेनाप्रहारकल्लोलवलनावलिताम्बरम् ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

क्षुब्ध हुई दोनों सेनाओं का ऐसा भीषण युद्ध हुआ कि उनमें नगर, ग्राम, पर्वत, वन और मनुष्य पीसे गये थे, बड़े- बड़े उद्धत दानव विद्यमान थे, सैकड़ों बड़े-बड़े आयुधो से काटे गये दानवरूपी पर्वतो से सब दिशाएँ भरी थी, परस्पर तहस-नहस किये गये अस्त्र आदि के चूर्णो से आकाश का मध्यभाग भरा था, भुशुण्डी नामक अस्त्र समूह के शब्दों से मेरूपर्वत के सैकड़ों शिखर ढह रहे थे, बाणरूपी ओंधी से दैत्य ओर देवताओं के मुखरूप कमल कटे थे ओर दोनों सेनाओं के प्रहाररूपी कल्लोलों के संचार से आकाश व्याप्त था