Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
जग्मुर्ज्वलदसिप्रान्तवातपातितभित्तयः ।
कणप्रकरतां शैलाः कल्पाग्निदलिता इव ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
चल रही तलवार की धारों के
वायु से जिनकी दीवारें गिरा दी गई थी अतएव प्रलयकाल की अग्नि से तहस-नहस किये गये से पर्वत
धूली के ढेर बन गये