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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, Verse 10

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

विलेसू रक्तमांसौघपूर्णैकार्णवतीरगाः । कल्पतालवदुत्ताला वेतालास्तालतालिताः ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

रक्त-मांस की राशि से पूर्ण एकमात्र सागरके तटपर बैठे हुए, प्रलयकाल के उत्पातभूत तालवृक्षों के समान ऊँचे करताल बजाकर नाच रहे वेताल इधर-उधर विलास करते थे