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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 59

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, verse 59 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 59

संस्कृत श्लोक

जेतुमन्यं कृतोत्साहैः पुरुषैरिह पण्डितैः । पूर्वं हृदयशत्रुत्वाज्जेतव्यानीन्द्रियाण्यलम् ॥ ५९ ॥

हिन्दी अर्थ

केवल मन पर विजय पाने के लिए ही नहीं, बाह्य शत्रुओं के ऊपर जय पाने के लिए भी डन्द्रियों पर विजय पाना आवश्यक है, ऐसा कहते है। औरों पर विजय पाने के लिए प्रोत्साहित हुए विद्वान लोगों को पहले हृदय स्थित शत्रु होने के कारण इन्द्रियों पर विजय अवश्य प्राप्त करना चाहिये