Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
सेव्यमानोऽपि भोगौघो न खेदायास्य जायते ।
कालकूटः किलेशस्य कण्ठे प्रत्युत राजते ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
विविध भोगों का यद्यपि
वह सेवन करता है, तथापि वे इसके पुनर्जन्म आदि दुःख के लिए नहीं होते । देखिए न कालकूट (विष)
भगवान श्रीशंकरजी के कण्ठ में क्लेश देना तो दूर रहा, बल्कि शोभा ही करता है