Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव ।
चित्तं तु नाहमेवेति यः पश्यति स पश्यति ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
सूत में मणियों की भाँति सम्पूर्ण जगत मुझमें ही गुँथा है और चित्त भी मैं नहीं हूँ,
इस तरह जो देखता है, वही पूर्वोक्त पूर्ण आत्मा को देखता है