Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
देशकालवशोत्थानि न ममेति गतभ्रमम् ।
शरीरे सुखदुःखानि यः पश्यति स पश्यति ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
देशवश उत्पन्न जो आधिभौतिक, काल वश उत्पन्न जो आधिदैविक तथा शरीर में उत्पन्न जो
आध्यात्मिक सुखदुःख है, वे मेरे नहीं हैं, इस तरह जो भ्रमरहित दृष्टि से देखता हे, वही पूर्वोक्त पूर्ण
आत्मा को देखता है