Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
कोऽहं कथमिदं चेति यावन्न प्रविचारितम् ।
संसाराडम्बरं तावदन्धकारोपमं स्थितम् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
“भें कौन हूँ” “ये शरीरादि कैसे प्राप्त है" यह जव
तक विचार नहीं किया गया, तभी तक यह अन्धकार के तुल्य संसार आडम्बर स्थित है