Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
न जायते न म्रियते कुम्भे कुम्भनभो यथा ।
भूषिते दूषिते वापि देहे तद्वदिहात्मवान् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे घट में घटाकाश न उत्पन्न होता है ओर न मरता
है, वैसे ही इस संसार में शरीर के भूषित या दूषित होने पर भी आत्मज्ञानी भूषित या दूषित नहीं होता
यानी घटाकाश के तुल्य अविकृत ही रहता है