Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
दृष्टचिद्भास्करा प्रज्ञापद्मिनी पुण्यपल्लवा ।
विकसत्यमलोद्योता प्रातर्द्यौरिव रूपिणी ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
चिद्रूपी आदित्य का दर्शन कर लेने पर गुरुसेवा, श्रवण, समाधि का अभ्यास
आदिरूप पुण्यपल्लववाली प्रज्ञापद्विनी हृदयरूपी सरोवर में ऐसे खिलती है जैसे कि प्रातःकाल में
निर्मल प्रकाश से युक्त अतएव सुन्दर प्रकाश खिलता है