Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
तदेवान्यत्वमादत्ते खमहोरात्रयोरिव ।
यदतुच्छमनायासमनुपाधि गतभ्रमम् ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
जो तुच्छ नहीं है, क्लेशशून्य है, उपाधिरहित है, भ्रम से शून्य है और तत्-
तत् कल्पनाओं से रहित है, वह एकमात्र सुख के लिए ही है