Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
एवं हि मनसः कर्म कर्मबीजं मनः स्मृतम् ।
अभिन्नैव तयोः सत्ता यथा कुसुमगन्धयोः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
मन की कर्मरूपता प्राप्ति का उपसंहार करते हुए कर्म ओर मन की परस्पर बीजरूपता और
अभिन्नसत्ता को कहते हैं।
इस प्रकार मन से कर्म की उत्पत्ति हुई हे । मन का भी कर्म ही बीज कहा गया हे । इन दोनों की सत्ता
फूल ओर सुगन्ध की सत्ता के समान अभिन्न ही हे