Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 2, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 2, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
तस्माद्राम जगन्नासीन्न चास्ति न भविष्यति ।
चेतनाकाशमेवाशु कचतीत्थमिवात्मनि ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
अन्य मत के खण्डित होने पर अब अवशिष्ट अपने सिद्धान्त को दिखलाते हैं।
इसलिए हे श्रीरामचन्द्रजी, जगत न तो था, न है और न होगा । चिदाकाश ही शीघ्र अपने में इस
प्रकार स्फुरित हुआ है