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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 2, Verse 4

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 2, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

सहकारिकारणानामभावे यद्यवोदितम् । मूलकारणमेवाङ्ग तत्स्वभावस्थितिं गतम् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि सहकारी कारणों के अभाव में भी रज्जुमें सर्पादि के समान जगद्रूपी अंकुर आविर्भूत हुआ है, ऐसा मानते हैं, तो हे श्रीरामचन्द्रजी, मूलकारण ही भ्रान्तिवश जगत्स्वभावता को प्राप्त हुआ है, वस्तुतः जगत की सृष्टि नहीं हुई है; इसलिए प्रलय में जगत की कल्पना व्यर्थ है