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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

मनसा कर्मणा वाचा यदा क्षुभ्यति नो वपुः । शान्तात्मा तिष्ठति स्वस्थो जीवधातुस्तदा त्वसौ ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

वाचिक और कायिक विक्षेप की निवृत्ति होने पर स्वप्न का उदय होता है, मानिक विक्षेप की भी यदि निवृत्ति हो जाय, तो चुबुप्ति होती है, इस आशय से कहते है । जिस समय शरीर, मन, वचन और कर्म से क्षोभ को प्राप्त नहीं होता हे, उस समय यह जीव चेतन शान्तस्वरूप ओर स्वस्थ होकर रहता है