Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
व्यवहारी यदा कायो मनसा कर्मणा गिरा ।
भवेत्तदा मरुन्नुन्नो जीवधातुः प्रसर्पति ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई कहे देह में जीव रहे, पर उसकी रूप आदि की दशा के लिए प्रवृत्ति में क्या हेतु है ? इस
पर कहते है।
जिस समय यह शरीर मन, वचन और कर्म से व्यवहार करनेवाला होता है, उस समय प्राणवायु से
प्रेरित जीव चेतन, तालाब से नाली आदि के द्वारा जल के सदृश, हृदय से निकलकर बाहर संचार करता
है, फैलता है