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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

परस्परं संमिलतां सर्गाणां रूढभाविनाम् । देहसत्ता भृशं रूढा देहाभावस्तु विस्मृतिः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार तुल्य कर्म, वासना आदि वाली विभिन्न मनोराज्यरूप सृष्टियों का एक साथ फलोन्मुखता द्वारा सम्बन्ध होने से व्यष्टि-समष्टि स्थूल देहों का अस्तित्व भी बद्धमूल है, ऐसा जानिये । उक्त देहसत्ता की विस्मृति होने पर तो देह का अभाव ही स्वाभाविक हे