Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 65
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, verse 65 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 65
संस्कृत श्लोक
विचारः सफलस्तस्य विज्ञेयो यस्य सन्मतेः ।
दिनानुदिनमायाति तानवं भोगगृध्रता ॥ ६५ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस सद्बुद्धि पुरुष की विचार करने से संसारिक
विषयभोगलिप्सा दिन प्रतिदिन घटती जाती है, उसके विचार को सफल जानना चाहिए। भाव यह कि
वैराग्यपूर्वक ही विचार फलप्रद होता है। यदि कोई रागी पुरुष विचार करे, तो उसे विचारफल भोगवासना-
तानव (क्षीणता) तनिक भी प्राप्त नहीं हो सकता है