Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 49
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
तया स्वप्नेऽपि यदृष्टं तत्काले सत्यमेव तत् ।
चिदणोरन्तरे सन्ति समस्तानुभवाणवः ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे बीज के अन्दर सूक्ष्मरूप से
पत्ते, लता, फूल, फलरूप अणु रहते हैं वेसे ही चिद् अणु के अन्दर सब सूक्ष्म अनुभव यानी जगत के
आकार की वासनाएँ विद्यमान हैं