Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
बीजं जहद्बीजवपुः फलीभूतं विलोक्यते ।
ब्रह्माजहन्निजवपुः फलं बीजे च संस्थितम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्म निर्विकल्प, अद्वितीय और असंग होने से कारण नहीं है ओर आदि कारण है, ऐसा जो कहा,
उसके अभिप्राय को स्पष्ट करने के लिए पूर्वोक्त बीजरूप दृष्टान्त की अपेक्षा ब्रह्म में जो भेद है, उसे
कहते हैं।
लोक में बीज अपने आकार का त्याग करके अंकुर आदिरूप फल में परिणत देखा जाता है; ब्रह्म
वैसा नहीं है, ब्रह्म अपने आकार का त्याग किये बिना ही जगद्रूप विवर्तं का कारण होता है, वहाँ पर फल
और बीज दोनों उपस्थित रहते हैं इसलिए जगद्विवर्त के उपादान ब्रह्म को अपनी तुल्य सत्तावाले
कार्य के न होने से अकारण कहा, यह भाव है