Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, Verse 7

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

इत्युक्त्वा मुञ्चतोर्वाष्पं तयोः सोऽन्तरधीयत । तप्तांग्योरिव रोदस्योः सममंशुभिरंशुमान् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

यह कहकर भगवान काल जैसे सूर्य सन्तप्त अंगवाले आकाश और पृथ्वी की उपेक्षा कर अपनी किरणों के साथ अन्तर्हित हो जाते हैं वैसे ही स्नेह से आँसू बहा रहे भृगु और शुक्राचार्य की उपेक्षा कर अन्तर्हितहो गये