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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, Verse 6

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

कल्याणमस्तु वां यामो वयं त्वभिमतां दिशम् । न किंचिदपि यच्चित्तं यस्य नाभिमतं भवेष्पत् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

आप लोगो का कल्याण हो, मेँ अपनी अभिमत दिशा को जा रहा हूँ। (दिशा का ˆअभिमत“ जो विशेषण है, वह अनभिमत की व्यावृत्ति के लिए नहीं है, क्योकि पूर्ण आत्मा के लिए अनभिमतवस्तु ही प्रसिद्ध नहीं है । जिसे “यह अभिमत है” ओर (यह अनभिमत है" यह विकल्प होता है अनभिमत का त्यागकर अभिमत को प्राप्त कर रहा वह चित्त अवास्तविक है; इसलिए "अभिमत दिशा इस वाक्य का परमप्रेमास्पद आत्मभाव में अवस्थित यह अथि, इस तरह के स्वाभिप्राय का सूचन करने के लिए “अभिमत इस विशेषण का उपादान किया गया है, यह दशति हुए कहते हैं ।) जिसको अभिमत नहीं होता ऐसा जो चित्त है, वह कुछ भी नहीं है, यानी अवास्तविक है