Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
मत्पुत्रोऽयमिति स्नेहो भृगुमप्यहरत्तदा ।
परमात्मीयता देहे यावदाकृतिभाविनी ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
उस समय यह मेरा पुत्र है, इस स्नेह ने परमज्ञानी भृगुजी का भी आकर्षण कर लिया ।
देह में अत्यन्त आत्मीयता जीवनभर प्रबल प्रारब्ध के कारण अवश्य ही रहती है