Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 15, Verse 49

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 15, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 49

संस्कृत श्लोक

व्यपगतममतामहान्धकारः पदममलं विगतैषणं समेत्य । प्रभवसि यदि चेतसो महात्मंस्तदतिधिये महते सते नमस्ते ॥ ४९ ॥

हिन्दी अर्थ

हे महात्मन्‌, सकल इच्छाओं की निवृत्ति करनेवाले, पूणनिन्दरूप, अविद्यादि दोषों से रहित पद को सम्यक्‌ ज्ञान से प्राप्त कर ममतारूपी महाअंधकार से रहित हुए आप यदि चित्तके नाश में समर्थ हुए, तो अपरिमितबुद्धि, महान से महान्‌, परिपूर्ण परमार्थ सत्यब्रह्मरूप आपको नमस्कार है यानी आप हम लोगों के भी सदा के लिए वन्दनीय हो जायेंगे