Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 15, Verse 41
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 15, verse 41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
अवस्थित इव स्वस्थः प्रतिबिम्बेषु भास्करः ।
संत्यक्तलोककर्मापि बुद्ध एवाप्रबुद्धधीः ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे प्रतिबिम्बो में स्थित सूर्य वस्तुतः स्वस्थ होता हुआ भी अस्वस्थ-सा,
चंचल सा प्रतीत होता हे, वैसे ही जिसने सम्पूर्ण लौकिक व्यवहारो का त्याग कर दिया है, ऐसा ज्ञानी
पुरुष ही व्यवहार स्थिति में अज्ञानी होता है