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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 15, Verse 39

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 15, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 39

संस्कृत श्लोक

सुखेषु सुखिता नित्यं दुःखिता दुःखवृत्तिषु । महात्मानो हि दृश्यन्ते दृश्य एवाप्रबुद्धवत् ॥ ३९ ॥

हिन्दी अर्थ

जिसकी बुद्धि विषय पर आसक्त नहीं है, ऐसे विद्वान तत्त्वज्ञ पुरुष जब तक शरीर रहता है तब तक दुःख के निमित्त के प्राप्त होने पर दुःख का ओर सुखहेतु के प्राप्त होने पर सुख का अज्ञानी के तुल्य अभिनय करते हैं ॥ ३ ८॥ महात्मा लोग सुख निमित्तो की प्राप्ति होने पर सुखी की तरह और दुःखनिमित्तों की प्राप्ति होने पर दुःखी की तरह केवल लौकिक व्यवहार के विषय में ही अज्ञानी के सदृश बर्ताव करते हैं, आत्मतत्त्व में तो वे सुस्थिर रहते हैं, अज्ञानी के तुल्य व्यवहार नहीं करते हैं