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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 15, Verse 36

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 15, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

ये परिज्ञातगतयो ये चाज्ञाः पशुधर्मिणः । लोकसंव्यवहारेषु ते स्थिता लोकजालवत् ॥ ३६ ॥

हिन्दी अर्थ

अतएव अन्य व्यवहा में उनकी समानता ही है, ऐसा कहते है। जिन लोगों को तत्त्वज्ञान हो गया है और जो पशुओं के सदुश आचरणवाले अज्ञानी हे, वे दोनों ही लोकव्यवहारो में जैसा लोक का जाल है, उसी के अनुसार स्थित हैं यानी आचरण करते हैं