Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 45

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, verse 45 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 45

संस्कृत श्लोक

न समीहितमस्तीह नासमीहितमस्ति मे । नियते रचनां द्रष्टुं केवलं विहराम्यहम् ॥ ४५ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि शंका हो कि उस शरीर से तुम्हें क्या करना है ? तो इस पर कहते हैं। इस संसार में न तो मेरा कुछ अभीष्ट है और न अनिष्ट है, केवल नियति की रचना देखने के लिए मैं इस जगत में विहार कर रहा हूँ