Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 34
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, verse 34 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
इत्युक्तवन्तं प्रोवाच भृगुर्जन्मान्तरात्मजम् ।
स्मरात्मानं प्रबुद्धोऽसि नाज्ञोऽसीति रघूद्वह ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, शुक्र के यह कहने पर भृगुजी ने जन्मान्तर के अपने पुत्र से कहा : तुम अपना
स्मरण करो, क्योकि तुम ज्ञानी हो, मूढ नहीं हो