Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
भवतोर्दर्शनेनाहमद्य निर्वृतिमागतः ।
सममागतयोर्लोके शीतलोष्णरुचोरिव ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
हे भगवन्, इस लोक मेँ एक साथ
आये हुए चन्द्रमा और सूर्य के समान आप लोगों के दर्शन से आज मैं परम सुख को प्राप्त हुआ हूँ