Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
अथ शान्तजपो राम स समङ्गातटे द्विजः ।
तावुवाच वचः शान्तममृतस्यन्दसुन्दरम् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर हे श्रीरामचन्द्रजी, समंगा के तट मेँ समाधि से विरत उस ब्राह्मण ने इन दोनों से (काल
ओर भृगु से) अमृतबिन्दु के तुल्य सुन्दर शान्त वचन कहा