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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 12, Verse 4

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 12, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

या एताः संविदो ब्राह्म्यो मननैककलङ्किताः । एतत्तत्कर्मणां बीजमप्यकर्मैव विद्धि ताः ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

जो ये ब्रह्मसंविद्रूपी जीव हैं, वे एकमात्र देहात्मभाव के पुन: पुनः अनुसन्धान से कलंकित हैं, वही देहात्मभाव का अनुसन्धान पाप और पुण्य की प्रवृत्तियों का बीज है। देहात्मभाव के अनुसन्धान से कलंकित होने पर भी उन जीवों को आप निर्विकार ब्रह्म ही जानिये