Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 65
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, verse 65 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 65
संस्कृत श्लोक
अन्योन्यरूपास्त्वत्यन्तं विकल्पितशरीरकाः ।
मनःशक्तय एतस्मादिमा निर्यान्ति कोटयः ॥ ६५ ॥
हिन्दी अर्थ
परस्पर मिलते-जुलते रूपवाली, सर्वथा विकल्पित आकारवाली
ये करोड़ों मन की शक्तियाँ इस परमात्मा से ही उत्पन्न हुई है